औंढा नागनाथ क्यों महत्वपूर्ण है
भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में औंढा नागनाथ आठवाँ है। अधिकांश तीर्थयात्रियों के लिए यह जीवनभर की तीर्थयात्रा का एक पड़ाव है — और कई लोग बताते हैं कि यह सबसे शांत पड़ाव है, क्योंकि यह मंदिर आज भी पर्यटक आकर्षण नहीं, बल्कि रोज़ जीवंत पूजा-स्थल जैसा लगता है।
क्या देखें
हेमाडपंती शैली की काले पत्थर की वास्तुकला, ज़मीन के नीचे स्थित गर्भगृह और अद्भुत पीछे की ओर मुँह किए नंदी — ये तीन चीज़ें हर आगंतुक याद रखता है। मंदिर सुबह से अभिषेक के साथ खुलता है और शाम की आरती के बाद बंद होता है।
त्योहारों के हिसाब से योजना बनाएँ
महाशिवरात्रि साल की सबसे व्यस्त रात होती है। श्रावण मास में प्रतिदिन रुद्राभिषेक होता है। यदि आप शांत और बिना जल्दबाज़ी के दर्शन चाहते हैं, तो त्योहारों के बीच के सप्ताह आदर्श हैं — और उसी समय कमरे बुक करना भी सबसे आसान होता है।
